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16 साल बाद वही इलाके में फिर हमला: अंटू इस्सर पर हुई जानलेवा फायरिंग

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समस्तीपुर: नगर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर में मंगलवार रात करीब साढ़े 9 बजे एक भयानक और सनसनीखेज़ घटना हुई। प्रॉपर्टी डीलर और सिनेमा हॉल संचालक अंटू इस्सर अपने सहयोगी शुभम सिंह उर्फ ईशू के साथ काम निपटाकर जितवारपुर से अपने बहादुरपुर स्थित आवास लौट रहे थे। जैसे ही वे घर के बाहर पहुंचे, कार और बाइक पर सवार 5 से 7 हथियारबंद बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
गोलीबारी के दौरान ईशू के कंधे में गोली लगी, जबकि अंटू इस्सर सुरक्षित बच गए। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भीड़भाड़ वाले इलाके में लोग अपने घरों और दुकानों में छिप गए। हमलावरों ने देखते ही देखते जतवारपुर‑बिशनपुर की ओर फरार होने की कोशिश की।
नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी में आरोपितों के नाम शामिल हैं: शत्रुध्न राय (मगरदही वार्ड-35), राजीव सिंह उर्फ पुल्लू सिंह (शेखोपुर, मथुरापुर), राहुल यादव उर्फ चुसनी (कबीर आश्रम, स्टेशन रोड), मनीराम उर्फ मनीया (स्टेशन रोड वार्ड-23), और लक्की खान (कबीर आश्रम, स्टेशन रोड)। इसके अलावा 5-7 अज्ञात बदमाशों के शामिल होने की आशंका जताई गई है। प्राथमिकी में बताया गया है कि सभी हमलावर हत्या की नीयत से पिस्टल लेकर आए थे और ताबड़तोड़ गोलियां चला रहे थे।
फायरिंग के दौरान हमलावरों ने एक उजले रंग की कार, दो बाइक, और रेकी के लिए इस्तेमाल की गई दो अन्य बाइक का प्रयोग किया। अंटू इस्सर की गाड़ी के पिछले हिस्से में भी गोली लगी, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस ने घटनास्थल से चार खोखा बरामद किए। आसपास के दुकानदार अपनी दुकानों में छिप गए। घायल ईशू को पहले कार से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सड़क जाम के कारण स्थानीय लोगों ने उन्हें बुलेट बाइक से अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सक डॉ. महेश ठाकुर ने ऑपरेशन कर कंधे से गोली निकाल दी। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।
देर रात एसपी अरविंद प्रताप सिंह घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ सदर एसडीपीओ-1 संजय कुमार पांडेय और नगर व मुफस्सिल थाने की पुलिस बल मौजूद थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए। सूत्रों के अनुसार, फायरिंग के दौरान बदमाशों के एक सदस्य को भी गोली लगी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई।
पुलिस अब नामजद और अज्ञात आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक छापेमारी कर रही है। जांच में पुरानी रंजिश, आपसी विवाद और संपत्ति संबंधी कारणों को भी शामिल किया गया है।पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह हमला पुरानी रंजिश और 2010 की घटना से जुड़ा हो सकता है। उस समय अंटू इस्सर पर इसी क्षेत्र में फायरिंग हुई थी, जिसमें उनके फूफेरे भाई अजितेश कुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। करीब 16 साल बाद उसी जगह के पास पुनः हमला हुआ।समस्तीपुर में अंटू इस्सर पर हुई गोलीबारी केवल एक व्यक्तिगत विवाद या रंजिश की घटना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की गंभीर चुनौती को भी उजागर करती है। भीड़भाड़ वाले इलाके में हथियारबंद बदमाशों का अंधाधुंध फायरिंग करना दर्शाता है कि आपराधिक तत्व अब खुलेआम और निडर होकर अपराध कर रहे हैं, और आम नागरिक तथा व्यवसायी खतरे में हैं।
पुलिस द्वारा शीघ्र कार्रवाई और आरोपितों की गिरफ्तारी आवश्यक है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि क्या पुरानी रंजिशों और संपत्ति विवादों के कारण सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन को तेज़ और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हमले दोबारा न हों।
इसके साथ ही यह सामाजिक चेतावनी भी है कि लोग अपने आसपास की सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और आपसी सहयोग पर ध्यान दें। अपराधियों को भयभीत करने और कानून के दायरे में लाने के लिए सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समुदाय का सतर्क और जागरूक होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।अंटू इस्सर पर हुए हमले ने समस्तीपुर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके में हथियारबंद बदमाशों की अंधाधुंध फायरिंग यह दिखाती है कि अपराधी अब निडर होकर सार्वजनिक जगहों पर भी हमले कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई ज़रूरी है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय सुरक्षा इंतजाम और नागरिक सतर्कता भी बढ़ाने की आवश्यकता है। पुरानी रंजिश और संपत्ति विवादों के चलते हुई इस घटना से सीख यह है कि केवल आरोपितों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समुदाय और प्रशासन मिलकर भविष्य में ऐसे हमले रोकने के उपाय करें।

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